26 August 2019

अगस्त 2019 पौधरोपण मुहीम

16 Aug, 2019:  गावँ के कुछ भाई जिनमे प्रताप पटवाल, रघुबर रावत , बॉबी भाई , प्रताप रावत और आनंद पटवाल जी  दिल्ली से गावँ गए "शतावरी" के पौधरोपण कार्यक्रम के लिए , रास्ते मै हल्द्वानी मैँ  मन्नू भाई (मनोज पटवाल और अशोक) को भी साथ लिए. ...  पौधे पहले ही मन्नू भाई के घर आ गए थे ...


17 की सुबह गावँ पहुँचकर बैठक करी और तय हुवा की कल हम ये पौधरोपण और वितरण कार्यक्रम करेंगे  ... उसी दोपहर हम सभी भाई और गावँ के अन्य लोग नैधना देवी कौथिक मैं गए ...

अगले दिन यानी 18 की सुबह कार्यक्रम की शुरुवात गायत्री मन्त्र और गणेश आरती से की गई.... जिसमे गावँ के सभी लोगों ने सहयोग किया  ...







19 June 2019

2019 कबड़ोली :

इस बार दिल्ली मैं रहने वाले सभी भाइयों ने एकजुट होकर ये प्रयास किया की अपनी दूसरी पीढ़ी को एकजुट करने, उन्हें अपने मूल से परिचित कराने, आपसी जान पहचान कराने के उद्देश्य से एक सामूहिक ग्वेल ज्यू की पूजा आयोजन किया जाए,  सभी अन्य शहरों मैं हमारे भाइयों को इसकी सूचनी दी गई और उनका भी पूरा सहयोग करने का अस्वाशन आया  ...




फिर हमारे नौहला को साफ़ करने का भी हम सभी ने बीड़ा उठाया, जिसके लिए खासकर चौन  से लाल मिटटी लाई गई  और रात को सभी शहरों में रहने वाले और गावं के भाइयों ने मिलकर नौला की सफाई की  ....


काबड़ोली ओलिंपिक :

इसका मुख्य मकसद हमारे बच्चों महिलाओं को एक दूसरे से जोड़ना जान पहचान कराना था  ....
जिसमें सभी बच्चों ने भाग लिया ऊपर ने नीचे दाएं से बाएं पूरे गावं के बच्चे आये थे और लड़कों का क्रिकेट मैच , लड़कियों के लिए म्यूजिकल चेयर और महिलाओं ने झोड़े और म्यूजिकल चेयर मै हिस्सा लिया, युवा बच्चे फुटबॉल से ही बोलीबॉल खेल रहे थे। .... 

सायद मेरी जिंदगी मैंने  ऐसा पहली बार देखा की सभी पीढ़ी एक साथ खेल-कूद रही थी  .....  ये एक छोटा प्रयास था अपने बच्चों को जोड़ने का, उनको अपनी संस्कृति से जोड़ने का, अपनी पहचान कबडोली से आत्मसात करने का  ....





बाकी अन्य फोटो देखने के लिए क्लिक कीजिये 


सभी भाई लोगों के सहयोग के लिए धन्यवाद  ..

22 May 2015

Maggi

DO NOT IGNORE THIS INFORMATION, especially those who are fond of Maggi...give ur 2 min to read n share these 7 horrible facts about maggi...

Many of us can't live without " Maggi " especially when one is away from home, in a foreign land. Here is a piece of information to share so that we can remove the potential health hazard of consuming Maggi. Maybe you should print this to keep as a reminder, pin it up in the kitchen.

1. Atta Maggie contains? DSG (DiSodium Glutamate), which does contain Bactosoytone. Not written in ingredients as such, hidden under alias Flavor-627. using Bactosoytone, itself made from soy protein using a catalyst enzyme porcine (taken from intestine of Pig).

2. The current cooking instruction printed on instant noodles label is wrong.
Normally, the way we cook the instant noodles is to put the noodles into a pot with water, throw in the powder and let it cook for around 3 minutes and then it's ready to eat. (WRONG!)

3. Nestlé have faced criticism over their advertising of the Maggi brand, adhering to marketing regulations in developed countries, but making misleading claims in developing countries where regulation permits it.

4. The dry and crunchy noodles contains wax. It contains wax – able to stay inside body for 4 to 5 days.

5. The advert made false claims that the noodles would "help to build strong muscles, bone and hair". The British Advertising Standards Authority said that the advert did not abide by the new EU consumer protection legislation, by which advertisers have to provide proof of health claims.

6. One serving (1 block or 100 grams) of noodles contains 1170 mg. of sodium aka salt n all we know SALT is responsible for increase in Blood Pressure and heart patients all over the world.

7. Boiling the separately packaged flavors in water changes the MSG (Monosodium glutamate) to toxic form - 'Silent damage' to the brain...also linked to asthma attacks, cause disabling arthritis, and even serious depressions, behavioral problems in children....
MSG has been found to be more toxic than all other food toxins, poisons and allergens.!!!
http://www.amazon.com/In-Bad-Taste-Symptom-Complex/dp/0929173309/ref=sr_1_1?s=books&ie=UTF8&qid=1331593958&sr=1-1

Maggi is Non Veg - - -try this experiment at home

Boil chicken maggi soup powder and vegetarian maggi noodles masala powder

After boiling, taste both of them....they will taste the same...all the best

Think about it...
http://zeenews.india.com/news/health/healthy-eating/maggi-contains-high-amount-of-monosodium-glutamate-faces-ban-in-up_1598187.html

http://zeenews.india.com/news/videos/top-stories/maggi-under-regulatory-scanner-for-excess-amount-of-lead-msg_1598872.html

UNTOLD STORIES
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21 August 2014

योग का इतिहास : History of Yog



can get DVD from www.vishuddhifilms.com     or  or www.rajivmalhotra.com/store/

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हमारी संस्कृति के गूढ़ ज्ञानो को जरूर जानें  … 


DVD के बारे में :

योग की 6000 साल की यात्रा :

*  6 सालों की रिसर्च
*  30 प्रसिद्ध विद्वानों का योगदान
*  84 पुरातात्त्विक स्थल -- 137 जगह
*  37 म्यूज़ियम, लाइब्रेरीज, मंदिर

योग इन हड़प्पा सभ्यता, वैदिक समय मैं, जैनिज़्म, और बुद्धिस्म

हजारों साल पहले उपनिषद के ऋषियों ने इन्द्रियों को बाहर की ओर छेदा गया है, बताया है ।

योग: चित्त की निर्वृत्तियों का निरोध , द्रष्टा अपने स्वरूप में स्थित हो जाती है। ....

मनुष्य प्रशन्नता को स्थाई नहीं रख पाता , पूरी जिंदगी चित्त वृत्तियों में ही रहते हैं ....


DVD STARTS.......

समय चक्र :

3900 -- 1500 BC Indus Valley Civilisation

3000 -- 2000 BC Rigveda

1500 -- 800 BC Later Vedas & Brahmans

800 -- 600 BC Upanishadas

1400 -- 800 BC Mahabharat War

600 -- 500 BC Mahavir & Budhha

400 -- 300 BC Chandragupta & Ashoka

300 -- 250 BC Gita

184 -- 148 BC Patanjali

100 -- 150 AD Nagarjuna

375 -- 400 AD Iron Pillar

470 -- 775 AD Elephanta Caves

750 -- 800 AD Vigyan Bhairav

800 -- 1800 AD Hatha Yog

900 -- 1100 AD Later Upanishadas

1000 -- 1200 AD Khajuraho Temples

900 -- 1200 AD 64 Yogin Cult

800 -- 1200 AD Gorakhnath

1300 -- 1400 AD Hath Yog Pradipika

1675 -- 1700 AD Gherand Sanhita

1783 AD Raja Mansingh

1757 - 1857 - 1947 AD British Raj

12/01/1863 - 04/07/1902 Vivekanand


पतंजलि नाग जनजाति के थे, वे 3 शास्त्रों के दाता थे : व्याकरण महाभाष्य , योगसूत्र , आयुर्वेद संहिता ।

पतंजलि ने चित्तोड़ (उस समय उसे मध्यमिका से जाना जाता था ) पर यवनों (ग्रीक) के आक्रमण का उल्लेख किया

योग के 4 अध्याय है : समाधिपाद , साधनपद , विभूतिपाद और कैवल्यपाद

हम दूसरे अध्याय से शुरू करते है :

इसके 8 अंग हैं :

1. यम : 5 प्रकार के हैं : अहिंसा , सत्य , अस्तेय , अपरिग्रह , ब्रह्मचर्य
2. नियम : 5 प्रकार के हैं : शौच , संतोष , तप , स्वाध्याय , ईश्वरप्रणिधाम
3. आसन :
4. प्राणायाम : जब शरीर स्थिर हो जाए , स्वाँस को नियंत्रित एवं सुष्म करना
5. प्रत्याहार : अंदर से आहार (एनर्जी) लेना
6. धारणा : विश्वास
7. ध्यान : एकाग्रचित मन
8. समाधि : ध्यान ही समाधी बन जाती है


योग का दर्शन सांख्य है और वो ईश्वर को नहीं मानता …

परंपरा में भारत का सबसे पुराना दर्शन सांख्य दर्शन ही है …

महाभारत में कहा गया है कि सांख्य और योग मिलकर ही सनातन दर्शन है

भारतीय चिंतन में पहले के चिंतकों में से एक थे कपिल मुनि

5000 साल पुरानी एक शील की आकृति मिली जो एक योगी की है । जो सिंधु घाटी सभ्यता के समय की है । जो की काल और भूगोल में सबसे पुरानी सभ्यता है ।

* Dr. V. Shinde के अनुसार ये शिला पशुपति की है जो की शिव के प्रतीक है

* वही Dr. A. Jamkhedar के अनुसार ये किसी स्त्री की है और जिस तरह के उसमे चूड़ियाँ दिखती है वैसे ही आज भी इस जगहों की स्त्रियां पहनती हैं ।

* Dr. V. Shinde : गघ्घर नदी के घाट (रोहतक के समीप), फरमाना जगह पर करीब 3.5 हेक्टेयर में हड़प्पा सभ्यता की एक सबसे बड़ी कब्रगाह मिली है, जिसका मॉडर्न scientific टेक्नोलॉजी से analysis किया गया है । वहां स्त्रियां बीच में बहुत आभूषणों और संसाधनों के साथ है जबकि पुरुष टूटी हड्डियों के साथ थोड़े बर्तन और आभूषणों के साथ पाये गए । जो ये दर्शाता है की उस समय भी स्त्रियों का स्थान बहुत ऊँचा हुआ करता था ।


सांख्य : सिद्धांत , सही ज्ञान, तत्वों का ज्ञान :: सांख्य के दार्शनिक योगासन में बैठकर तत्वों की निश्चित संख्या का ध्यान करते थे ।

योग : प्रयोग

सांख्य अंतिम सत्य के रूप में हर जीव में 2 तत्वों का अस्तित्व मानता है :

जड़ (प्रकृति ) : सत्व , रज , तम

चेतना : पुरुष (पुरू : सीमा , ष : शयन, निष्क्रियता )

शरीर रूपी पर में शयन करने वाला हर पुरुष चेतना की एक सीमित और निष्क्रिय इकाई है ।

Dr. V. Shinde, Archaeologist, Jt. Director, डेक्कन कॉलेज, पुणे : कोई सबूत नहीं किसी केंद्रीय सत्ता की, राजा की, व्यस्था कुछ ही व्यक्तियों के समूह द्वारा ही संभाली जाती थी । एक तरह का प्रजातंत्र की मिसाल पुरे विश्व को ।

अहिंसा एक व्यवहार थी न की सिर्फ एक सिद्धांत

Dr. S. R. Rao (Excavated लोथल और द्वारका), Ex . Dy. ASI : वे किसी पशु को भी हानि नहीं पहुंचते थे, कोई हिंसा का सबूत नहीं , इसलिए हम मान सकते हैं की वे बड़े शांतिप्रिय थे ।

सिंधु नगर की बड़ी बड़ी इमारतें स्नानागार थी , वे बड़े ही साफ़ थीं । वहां हर घर में एक बाथरूम होता था, वो छोटी-छोटी नालियों से होकर एक बड़े बड़े ड्रेनेज सिस्टम से जुड़ा था जो शहर के बाहर जाता था ।

हड़प्पा सभ्यता में कई हठ योग की मुर्तिया मिली, जिस हाथ योग के बारे में पतंजलि मौन थे ।



बुद्धा ने कहा : मैंने पुरातन पंथ को देखा और चला, उन्होंने बोला की "आप पहले जानो फिर मानो" क्योकि माने हुए धर्म से हिंसा ही होती है ।

अशोक ने बुद्ध की नीतियों को कई शिलालेखों में गुदवाया :


अशोक के दादा चन्द्रगुप्त थे (जो चाणकय के शिष्य थे) जो बाद में जैन हो गए थे और अंतिम समय में दक्षिण में श्रावणवेलगोला में आ गए थे ।

जैनो के पहले तीर्थांकर ऋषभदेव का वेदों में भी वर्णन है

युद्ध से बाद स्वयं को जीतना, स्वयं को जीतने वाला ही महावीर होता है ।

विज्ञानं भैरव (कश्मीरी शैव दर्शन) : ध्यान के 112 तरीके बताये गए हैं ।


संध्या भाषा : सांकेतिक भाषा
Dr. देवांगना देसाई (खजुराहो मंदिर) : योगी ने डोम्बि का आलिंगन कर रखा है , डोम्बि यानी धोबन ---> यहाँ डोम्बि शब्द का इस्तेमाल कुण्डिलिनी शक्ति के लिए किया हुवा है । यदि कुण्डिलिनी पाँचवे चक्र यानी विशुद्धि तक उठ गई है । जहाँ दो प्राणो का मिलान होता है : प्राण और अपान , पिंगला और इड़ा , सूर्य और चन्द्रमा । योगी समयरहित स्थिति में पहुँच जाता है ।


हठ योगियों में महान योगी थे गोरखनाथ । जिनके गुरु थे मत्स्येन्द्रनाथ ।
गोरखनाथ को राष्ट्रीय इष्टदेव के रूप पूजा जाता है और राजकीय सिक्को में गोरखनाथ का नाम है । वह उनके सम्मान में गोरख नाम से एक जिला भी है और नेपाल के लोग अपने को गोरखा भी बड़े गर्व से कहते है ।

बख्तियार ख़िलजी ने जब नालंदा विश्वविद्यालय जो नष्ट किया तब वह के बहुत से बौद्ध बिक्षु भागकर हिमालयी क्षेत्र में चले गए जैसे लद्दाख आदि ।

विवेकानंद जी द्वारा ही योग की पश्चिम की यात्रा शुरू हुई …

21 April 2014


 Smoking and cancer: What's in a cigarette?

A cigarette may look harmless enough - tobacco leaves covered in classic white paper. But when it burns, it releases a dangerous cocktail of about 4,000 chemicals including:
 at least 80 cancer-causing chemicals
 hundreds of other poisons.
 nicotine, a highly addictive drug, and many additives designed to make cigarettes taste nicer and keep smokers hooked.

This page has more information on the various poisons in cigarette smoke. You can also read about where these come from and how concentrated they actually are.
Cancer-causing chemicals in tobacco smoke
Tar - a mixture of dangerous chemicals
Arsenic - used in wood preservatives
Benzene - an industrial solvent, refined from crude oil
Cadmium - used in batteries
Formaldehyde - used in mortuaries and paint manufacturing
Polonium-210 - a highly radioactive element
Chromium - used to manufacture dye, paints and alloys
1,3-Butadiene - used in rubber manufacturing
Polycyclic aromatic hydrocarbons - a group of dangerous DNA-damaging chemicals
Nitrosamines - another group of DNA-damaging chemicals
Acrolein - formerly used as a chemical weapon
Other chemicals

Other poisons in cigarette smoke
Hydrogen cyanide - used as an industrial pesticide
Carbon monoxide - found in car exhausts and used in chemicals manufacturing
Nitrogen oxides - a major component of smog
Ammonia - used to make fertilisers and explosives
More poisons

Tar
Tar is a term that describes a collection of solid particles that smokers inhale when they light a cigarette. It is a mixture of lots of chemicals, many of which can cause cancer. When it settles, tar forms a sticky, brown residue that can stain smokers’ teeth, fingers and lungs.
Because tar is listed on packs, it is easy to believe that it is the only harmful part of cigarettes. But some of the most dangerous chemicals in tobacco smoke are present as gases, and do not count as part of tar. This means that cigarettes with less tar still contain all the other toxic chemicals.
Arsenic
Arsenic is one of the most dangerous chemicals in cigarettes. It can cause cancer as well as damaging the heart and its blood vessels.
Small amounts of arsenic can accumulate in smokers’ bodies and build up to higher concentrations over months and years. As well as any direct effects, it can worsen the effect of other chemicals by interfering with our ability to repair our DNA.
Fish and seafood can be major sources of arsenic, but in a form that is less toxic and more readily removed from the body. In contrast, tobacco smoke contains arsenic in a more dangerous form.
Benzene
Benzene is a solvent used to manufacture other chemicals, including petrol. It is well-established that benzene can cause cancer, particularly leukaemia. It could account for between a tenth and a half of the deaths from leukaemia caused by smoking.
Tobacco smoke contains large amounts of benzene and accounts for a big proportion of our exposure to this poison. The average smoker inhales about ten times more benzene than the average non-smoker.
And some studies have estimated that the amount of benzene that a person inhales through second-hand smoke over their lifetime could increase their risk of cancer.
Cadmium
Cadmium is a metal used mostly to make batteries. The majority of cadmium in our bodies comes from exposure to tobacco smoke. Smokers can have twice as much cadmium in their blood as non-smokers.
Studies have found that the amounts of cadmium present in tobacco smoke are capable of affecting our health. It is a known cause of cancer, and can also damage the kidneys and the linings of the arteries.
Our bodies have proteins that mop up harmful chemicals like cadmium, but the amounts in smoke can overload these proteins. Cadmium can also prevent our cells from repairing damaged DNA. Because of this, it can make the effects of other chemicals even worse.
Formaldehyde
Formaldehyde is a smelly chemical used to kill bacteria, preserve dead bodies and manufacture other chemicals. It is one of the substances in tobacco smoke most likely to cause diseases in our lungs and airways.
Formaldehyde is also a known cause of cancer. It is believed that even the small amounts in second-hand smoke could increase our lifetime risk of cancer.
Tobacco smoke is one of our major sources of formaldehyde exposure. Places where people smoke can have three times the normal levels of this poison.
Polonium-210
Polonium is a rare, radioactive element and polonium-210 is its most common form. Polonium strongly emits a very damaging type of radiation called alpha-radiation that can usually be blocked by thin layers of skin.
But tobacco smoke contains traces of polonium, which become deposited inside their airways and deliver radiation directly to surrounding cells. The lungs of smokers can be exposed to four times more polonium than those of non-smokers and specific parts may get a hundred times more radiation. One study estimated that someone smoking one and half packs a day receives the equivalent amount of radiation as someone having 300 chest X-rays a year.
Chromium
Chromium is a metal used to make metallic alloys, dyes and paints and comes in different types. Chromium III or ‘trivalent chromium’ is most commonly used. It is available as dietary supplements and is harmless.
On the other hand, chromium VI or ‘hexavalent chromium’ is very toxic, is found in tobacco smoke, and is known to cause lung cancer. It allows other cancer-causing chemicals (such as polycyclic aromatic hydrocarbons) to stick more strongly to DNA and damage it.
1,3-Butadiene
1,3-butadiene or BDE is an industrial chemical used in rubber manufacture. Some scientists believe that of all the chemicals in tobacco smoke, BDE may present the greatest overall cancer risk. It may not be as good at causing cancer as some of the other chemicals listed here, but it is found in large amounts in tobacco smoke.
Polycyclic aromatic hydrocarbons
Polycyclic aromatic hydrocarbons or PAHs are a group of powerful cancer-causing chemicals that candamage DNA and set cells down the road to becoming tumours.
One of these chemicals - benzo(a)pyrene or BAP - is one of the most widely studied of all tobacco poisons. BAP directly damages p53, a gene that normally protects our bodies against cancer.
Nitrosamines
Nitrosamines are a group of chemicals that can directly damage DNA, like polycyclic aromatic hydrocarbons (PAHs).
They are found in small amounts in food. But tobacco products, including those that are chewed rather than smoked, are by far our largest source of exposure to these chemicals. Even though they are found in relatively small amounts in cigarettes, they are very strong cancer-causing chemicals.
Acrolein
Acrolein is a gas with an intensely irritating smell and is one of the most abundant chemicals in cigarette smoke. It belongs to the same group of chemicals as formaldehyde and acetaldehyde, both of which can cause cancer.
Until now, it wasn’t clear if acrolein causes cancer as well, but recent experiments suggest that it can. We now know that acrolein can cause DNA damage that is similar to the damage seen in lung cancer patients. Since smoke contains up to 1,000 times more acrolein than other DNA-damaging chemicals, it could be a major cause of lung cancer.
Acrolein also stops our cells from repairing DNA damage, like arsenic and cadmium. And like hydrogen cyanide, it kills the hairs that normally clean our lungs of other toxins.
Other chemicals
Some of the other cancer-causing ingredients of tobacco smoke include:
metals, such as nickel, lead, cobalt and beryllium. While you may be exposed to some of these metals through domestic items or food, inhaling them in tobacco smoke is worse, because they are easily absorbed by the lungs.
acetaldehyde, which is also formed in your tissues when you drink alcohol - it is responsible for many nasty hangover symptoms
hydrazine, a very toxic chemical used mainly in rocket fuel

Hydrogen cyanide
Hydrogen cyanide is a poisonous gas. Of all the chemicals in tobacco smoke, it does the most damage to the heart and blood vessels.
Hydrogen cyanide does not cause cancer, but it increases the risk of other chemicals causing cancer by damaging cilia. These are tiny hairs lining the airways that help to clear toxins away. By killing cilia, hydrogen cyanide causes other dangerous chemicals to be stuck in the lungs and airways.
Carbon monoxide
Carbon monoxide is a colourless gas with no smell. It is formed when we burn carbon-based fuels, such as gas in cookers or petrol in car engines. It can make up as much as 3-5% of tobacco smoke.
Carbon monoxide sticks to our red blood cells in place of oxygen. This lowers our blood’s ability to transport oxygen and deprives our tissues and organs of this vital gas.
Like hydrogen cyanide, it kills cilia and reduces our lungs’ ability to clear away toxins. This means that while carbon monoxide does not cause cancer directly, it makes it easier for other chemicals to do so.
Nitrogen oxide
Nitrogen oxide is a gas found in car exhaust and tobacco smoke.
Our bodies use it in very small amounts to carry signals between cells. But in large amounts, it is a major air pollutant. It directly damages lung tissue and causes inflammation in the lungs.
Normally, our bodies produce small amounts of nitrogen oxide, which causes our airways to expand. The large amount of nitrogen oxide in tobacco smoke changes things in two ways:
When smokers are smoking, it expands their airways even further, making it easier for their lungs to absorb nicotine and other chemicals.
When they are not smoking, it shuts off their internal nitrogen oxide production line, causing their airways to constrict. This is one reason why regular smokers often have difficulty breathing.

Ammonia
Ammonia is a gas with a strong, irritating smell, and is used in some toilet cleaners. Some studies have found that ammonia enhances the addictive power of nicotine. It changes nicotine into a gas that is more readily absorbed into the lungs, airways and bloodstream.
Like carbon monoxide and hydrogen cyanide, ammonia also kills cilia.
More poisons
Tobacco smoke also contains many other poisons that produce harmful effects. These can be carried throughout the body via our blood vessels. As well as hydrogen cyanide and ammonia, gases like sulphur dioxide also kill cilia (protective hairs) in our lungs. This stops them from being able to clear away other harmful chemicals.
Chemicals like hydrogen sulphide and pyridine irritate our airways.

Toluene can damage brain cells and interfere with their development.

हार्ट अटैक: ना घबराये ......!!!

हार्ट अटैक: ना घबराये ......!!!

सहज सुलभ उपाय ....
99 प्रतिशत ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है पीपल का पत्ता....

पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें।

पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार।

इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती। दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें।

* पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है।
* इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।
* खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें।
* प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।
* अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें । ......

तो अब समझ आया, भगवान ने पीपल के पत्तों को हार्टशेप क्यों बनाया..

शेयर करना ना भूले..... शेयर करना ना भूले..... शेयर करना ना भूले.....


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03 September 2013

बबासीर (Piles) के इलाज़ के लिए ...







पाइल्स (मस्सा) का दर्द का बहुत ही पेनफुल होता है। अगर आपको भी पाइल्स की प्रॉब्लम है, तो आप इन घरेलू नुस्खों को अपनाकर इससे राहत पा सकते हैं-
अपनी डाइट में मूली का जूस शामिल करें। इससे आपको पाइल्स के दर्द में राहत मिलेगी। आप शुरुआत में एक चौथाई कप मूली का जूस लें। फिर धीरे- धीरे इसकी मात्रा बढ़ाते जाएं। एक दिन में दो बार जूस लें।

- पूरी रात तीन से चार अंजीर पानी में भिगो दें। फिर अंजीर और उसके पानी को दिन में कई बार पीएं। इससे पाइल्स का दर्द कम होगा।

- अनार के छिलकों को पानी में भिगो दें। फिर छिलकों को पानी से हटा दें। आपको जब भी प्यास लगे, इस पानी को पीएं।

- अगर पाइल्स का दर्द है और आपको आराम नहीं मिल रहा है, तो आप लस्सी में नमक, अदरक और पिपरकॉर्न मिलाकर पीएं। इससे आपको दर्द में जरूर राहत मिलेगी।

- आपको ब्लीडिंग हो रही है, तो आप आधा कप दूध में सरसों के दानों का पाउडर और चीनी मिलाकर मिलाएं। इसे खाली पेट सुबह पीएं।

- आम की गुठली के पाउडर में थोड़ा सा शहद मिला लें। फिर इसे दिन में दो बार लें। इससे आपको पाइल्स के पेन में आराम मिलेगा।

- एक चम्मच नीबू का रस, अदरक का रस और पुदीने के रस के साथ शहद मिलाकर पीएं। इससे आपको जरूर राहत मिलेगी।

- अगर पाइल्स का दर्द बहुत तेज हो रहा है, तो आप एक कप दूध में एक केले को अच्छे से मैश कर लें। फिर इसे दिन में दो से तीन बार पीएं।

- जामुन से पाइल्स में काफी हद तक आराम मिलता है। वैसे, यह फल गर्मियों के दिनों में ही मिलता है। ऐसे में आपको जामुन का भरपूर यूज करना चाहिए। आपको अगर पाइल्स की शिकायत है, तो आप एक मुट्ठी जामुन को नमक के साथ लें। आप इन्हें सुबह खाली पेट ही खाएं। इससे आपको पाइल्स में काफी रिलीफ मिलेगा।

- दो चम्मच शहद के साथ प्याज का जूस मिलाएं। इसे आप दिन में दो बार लें।

10 July 2013

कैंसर का इलाज़ व् जानकारी

आदरणीय भाइयो  और बहनों :

जरूर सुनें, डाउनलोड करें और फेलायें :
http://www.youtube.com/watch?v=PiRLcKNNKno

राजीव दीक्षित 

फ्री ट्रीटमेंटके लिए कॉल करें: 09866548278


कैंसर बहुत तेज़ी से बड़ रहा है इस देश में । हर साल बीस लाख लोग कैंसर से मर रहे है और हर साल नए Cases आ रहे है । और सभी डॉक्टर्स हात-पैर डाल चुके है । राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना के … " कैंसर के patient को कैंसर से death नही होती है, जो treatment दिया जाता है उससे death होती है " । माने कैंसर से जादा खतरनाक कैंसर का treatment है । Treatment कैसा है आप सभी जानते है .. Chemotherapy दे दिया, Radiotherapy दे दिया, Cobalt-therapy दे दिया । इसमें क्या होता है के शारीर का जो प्रतिरक्षक शक्ति है Resistance वो बिलकुल ख़तम हो जाते है । जब Chemotherapy दिए जाते है ये बोल कर के हम कैंसर के सेल को मारना चाहते है तो अछे सेल भी उसी के साथ मर जाते है । राजीव भाई के पास कोई भी रोगी जो आया Chemotherapy लेने के बाद वे उनको बचा नही पाए । लेकिन इसका उल्टा भी रिकॉर्ड है .. राजीव भाई के पास बिना Chemotherapy लिए हुए कोई भी रोगी आया Second & third Stage तक वो एक भी नही मर पाया अभी तक ।

मतलब क्या है Treatment लेने के बाद जो खर्च आपने कर दिया वो तो गया ही और रोगी भी आपके हात से गया । डॉक्टर आपको भूल भुलैया में रखता है अभी 6 महीने में ठीक हो जायेगा 8 महीने में ठीक हो जायेगा लेकिन अंत में वो जाता ही है , कभी हुआ नही है के Chemotherapy लेने के बाद कोई बच पाया हो । आपके घर परिवार में अगर किसीको कैंसर हो जाये तो जादा खर्चा मत करिए कियों की जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला नही होगा उसको इतना कष्ट होता है की आप कल्पना नही कर सकते ।

उसको जो injections दिए जाते है, जो Tablets खिलाई जाती है, उसको जो Chemotherapy दी जाती है उससे सारे बाल उड़ जाते है, भ्रू के बाल उड़ जाते है, चेहरा इतना डरावना लगता है के पहचान में नही आता ये अपना ही आदमी है। इतना कष्ट कियों दे रहे हो उसको ? सिर्फ इसलिए के आपको एक अहंकार है के आपके पास बहुत पैसा है तो Treatment कराके ही मानुगा ! होता ही नही है वो, और आप अपनी आस पड़ोस की बाते जादा मत सुनिए क्योंकि आजकल हमारे Relatives बहुत Emotionally Exploit करते है । घर में किसीको गंभीर बीमारी हो गयी तो जो रिश्तेदार है वो पहले आके कहते है ' अरे All India नही ले जा रहे हो? PGI नही ले जा रहे हो ? Tata Institute बम्बई नही ले जा रहे हो ? आप कहोगे नही ले जा रहा हूँ मेरे घर में ही चिकित्सा .... अरे तुम बड़े कंजूस आदमी हो बाप के लिए इतना भी नही कर सकते माँ के लिए इतना नही कर सकते " । ये बहुत खतरनाक लोग होते है !! हो सकता है कई बार वो Innocently कहते हो, उनका intention ख़राब नही होता हो लेकिन उनको Knowledge कुछ भी नही है, बिना Knowledge के वो suggestions पे suggestions देते जाते है और कई बार अच्छा खासा पड़ा लिखा आदमी फंसता है उसी में .. रोगी को भी गवाता है पैसा भी जाता है ।


कैंसर के लिए क्या करे ? हमारे घर में कैंसर के लिए एक बहुत अछि दावा है ..अब डॉक्टर ने मान लिया है पहले तो वे मानते भी नही थे; एक ही दुनिया में दावा है Anti-Cancerous उसका नाम है " हल्दी " । हल्दी कैंसर ठीक करने की ताकत रखता है । हल्दी में एक केमिकल है उसका नाम है कर्कुमिन (Carcumin) और ये ही कैंसर cells को मार सकता है बाकि कोई केमिकल बना नही दुनिया में और ये भी आदमी ने नही भगवान ने बनाया है । हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीस में है वो है देशी गाय के मूत्र में । गोमूत्र माने देशी गाय के शारीर से निकला हुआ सीधा सीधा मूत्र जिसे सूती के आट परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो । तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैंसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे । अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाके गरम करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना । Room Temperature में आने के बाद रोगी को चाय की तरहा पिलाना है .. चुस्किया ले ले के सिप कर कर । एक और आयुर्वेदिक दावा है पुनर्नवा जिसको अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और अच्छा result आयेगा । ये Complementary है जो आयुर्वेद के दुकान में पाउडर या छोटे छोटे पीसेस में मिलती है ।


इस दावा में सिर्फ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता है जेर्सी का मूत्र कुछ काम नही आता । और जो देशी गाय काले रंग का हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता है इन सब में । इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा ) सही अनुपात में मिलाके उबालके ठंडा करके कांच की पात्र में स्टोर करके रखिये पर बोतल को कभी फ्रिज में मत रखिये, धुप में मत रखिये । ये दावा कैंसर के सेकंड स्टेज में और कभी कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अछे परिणाम देते है । जब स्टेज थर्ड क्रोस करके फोर्थ में पोहुंच गया तब रिजल्ट में प्रॉब्लम आती है । और अगर अपने किसी रोगी को Chemotherapy बैगेरा दे दिया तो फिर इसका कोई असर नही आता ! कितना भी पिलादो कोई रिजल्ट नही आता, रोगी मरता ही है । आप अगर किसी रोगी को ये दावा दे रहे है तो उसे पूछ लीजिये जान लीजिये कहीं Chemotherapy सुरु तो नही हो गयी ? अगर सुरु हो गयी है तो आप उसमे हात मत डालिए, जैसा डॉक्टर करता है करने दीजिये, आप भगवान से प्रार्थना कीजिये उसके लिए .. इतना ही करे । और अगर Chemotherapy स्टार्ट नही हुई है और उसने कोई अलोप्यथी treatment सुरु नही किया तो आप देखेंगे इसके Miraculous रिजल्ट आते है । ये सारी दवाई काम करती है बॉडी के resistance पर, हमारी जो vitality है उसको improve करता है, हल्दी को छोड़ कर गोमूत्र और पुनर्नवा शारीर के vitality को improve करती है और vitality improve होने के बाद कैंसर cells को control करते है ।


तो कैंसर के लिए आप अपने जीवन में इस तरह से काम कर सकते है; इसके इलावा भी बहुत सारी मेडिसिन्स है जो थोड़ी complicated है वो कोई बहुत अच्छा डॉक्टर या वैद्य उसको हंडल करे तभी होगा आपसे अपने घर में नही होगा । इसमें एक सावधानी रखनी है के गाय के मूत्र लेते समय वो गर्वबती नही होनी चाहिए। गाय की जो बछड़ी है जो माँ नही बनी है उसका मूत्र आप कभी भी use कर सकते है। ये तो बात हुई कैंसर के चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैंसर हो ही न ये और भी अच्छा है जानना । तो जिन्दगी में आपको कभी कैंसर न हो उसके लिए एक चीज याद रखिये के, हमेसा जो खाना खाए उसमे डालडा तो नही है ? उसमे refined oil तो नही है ? ये देख लीजिये, दूसरा जो भी खाना खा रहे है उसमे रसेदार हिस्सा जादा होना चाहिए जैसे छिल्केवाली डाले, छिल्केवाली सब्जिया खा रहे है , चावल भी छिल्केवाली खा रहे है तो बिलकुल निश्चिन्त रहिये कैंसर होने का कोई चान्स नही है। और कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तिन कारन है, एक तो कारन है तम्बाकू, दूसरा है बीड़ी और सिगरेट और गुटका ये चार चीजो को तो कभी भी हात मत लगाइए क्योंकि कैंसर के maximum cases इन्ही के कारन है पुरे देश में ।


कैंसर के बारे में सारी दुनिया एक ही बात कहती है चाहे वो डॉक्टर हो, experts हो, Scientist हो के इससे बचाओ ही इसका उपाय है । महिलाओं को आजकल बहुत कैंसर है uterus में गर्वशय में, स्तनों में और ये काफी तेजी से बड़ रहा है .. Tumour होता है फिर कैंसर में convert हो जाता है । तो माताओं को बहनों को क्या करना चाहिए जिससे जिन्दगी में कभी Tumour न आये ? आपके लिए सबसे अच्छा prevention है की जैसे ही आपको आपके शारीर के किसी भी हिस्से में unwanted growth (रसोली, गांठ) का पता चले तो जल्द ही आप सावधान हो जाइये । हलाकि सभी गांठ और सभी रसोली कैंसर नही होती है 2-3% ही कैंसर में convert होती है लेकिन आपको सावधान होना तो पड़ेगा । माताओं को अगर कहीं भी गांठ या रसोली हो गयी जो non-cancerous है तो जल्दी से जल्दी इसे गलाना और घोल देने का दुनिया में सबसे अछि दावा है " चुना " । चुन वोही जो पान में खाया जाता है, जो पोताई में इस्तेमाल होता है वो नहीं ; पानवाले की दुकान से चुना ले आइये
उस चुने को कनक के दाने के बराबर रोज खाइये; इसको खाने का तरीका है पानी में घोल के पानी पी लीजिये, दही में घोल के दही पी लीजिये, लस्सी में घोल के लस्सी पी लीजिये, डाल में मिलाके दाल खा लीजिये, सब्जी में डाल के सब्जी खा लीजिये । पर ध्यान रहे पथरी के रोगी के लिए चुना बर्जित है ।

April 2013: The flip side of growth. 33,318 died of Cancer in Punjab in five years, 23,874 fresh cases found, says Punjab Health Minister. This is the outcome of a door-to-door survey.


आपने पूरी पोस्ट पड़ी इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद ।

वन्देमातरम ।।

04 July 2013

भारतीय POP Culture एक बहुत बड़ा धोका है : राजीव मल्होत्रा




Secularism in India is the seclusion of Dharmic History of India from its very own People of India.. It is a process to subvert the truth to coming out in the public domain.


We are NOT free, unless our minds are still enslaved.
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Rajiv Malhotra

हिंदी में रूपांतरित :

भारत में धर्मनिरपेक्षता का अर्थ भारत के अपने ही लोगों को भारत की धार्मिक इतिहास/मान्यताओं  से दूर करना हो गया है ...  यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो सत्य को दूर(नष्ट) करके उसे आम लोगों तक नहीं पहुचने दे रही !

The history of india has been erased, changed and altered by Abhrahmic elite, who re-created Indian education system,  laws, and media, to create a new society based on those distortions and called this Secularism...




How does digestion of Hinduism by Christianity works


 







30 June 2013

गो हत्या पर रोक जरूरी : आर्थिक और सांस्कृतिक दोनों पहलु

 जरूर देखे ...गाय  के बारे में ...

http://www.youtube.com/watch?v=3XY5d3KeN1I


गोहत्या का प्रश्न केवल धार्मिक आस्थाओं से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि देश के अर्थतंत्र, पर्यावरण व जलसंकट जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे इससे सीधे प्रभावित होते हैं। आज बड़ी गंभीरता से यह बात कही जाती है कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए होगा, इस दृष्टि से यदि कत्लखानों का विचार करें तो जलसंकट को बढ़ाने में इनकी भूमिका की अनदेखी नहीं की जा सकती।

एक कत्लखाने में प्रति पशु पांच सौ लीटर पानी लगता है। हिन्दुस्तान टाइम्स के प्रकाशित एक रपट के अनुसार कोलकाता के मोरी गांव कत्लखाने में 17 लाख 50 हजार लीटर पानी प्रतिदिन लगता है। इसके विपरीत एक व्यक्ति को प्रतिदिन औसतन 25 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इसका अर्थ यह हुआ कि कोलकाता के इस कत्लखाने में करीब 70 हजार लोगों के उपयोग का पानी नष्ट कर दिया जाता है।

मुम्बई के देवनार कत्लखाने में 18 लाख 50 हजार लीटर पानी प्रतिदिन खर्च होता है। यहां लगभग 74 हजार लोगों के उपयोग का पानी नष्ट कर दिया जाता है। आंध्र प्रदेश के हैदराबाद स्थित कत्लखाने अल कबीर एक्सपोर्ट लिमिटेड में 6 हजार 600 पशु प्रतिदिन काटे जाते हैं। यहां 1 लाख 32 हजार लोगों के उपयोग का पानी प्रतिदिन नष्ट कर दिया जाता है।

गाय का दूध 30 - 40 रु. प्रति किलो की दर से मिलता है। और 600 ml. कोल्ड ड्रिंक 30 rs. की है तो  एक लीटर 50 rs. पड़ा ... जबकि देश में 15 रु. लीटर पानी बिक रहा है। जिस देश में गाय का दूध नहीं बेचा जाता था उस देश में पानी बेचा जा रहा है। ये कत्लखाने जितना पानी बर्बाद कर रहे हैं उससे पानी का संकट देश में कितना गंभीर होने वाला है यह समझा जा सकता है। इसलिए यह विचार करने की आवश्यकता है कि आज देश में पानी की ज्यादा आवश्यकता है या मांस की।


कोलकाता : मोरी गावं :      17 लाख 50 हज़ार लीटर पानी          70 हज़ार लोगों के लायक पानी              3500 जानवरों का क़त्ल

मुंबई: देवनार             :       18 लाख 50 हज़ार लीटर पानी          74 हज़ार लोगो के लायक पानी              3700 जानवरों का क़त्ल

हैदराबाद; अल           :        33 लाख लीटर पानी                         1 लाख 85 हज़ार लोगों के लायक पानी   660 जानवरों का क़त्ल

The Economist (Aug 27, 2008) states: Five big food and beverage companies -- Nestle, Unilever, Coca-Cola, Anheuser-Busch and Danone -- consume almost 575 billion litres of water a year, enough to satisy the daily water needs of every person on the planet.

IPL in 2013 April in MH   1 match takes 3 lakh litre water ..16 match ..   Total 48 lakh litre of water for 8 weeks
 

India produced 3.643 million metric tons  of which 1.963 million metric tons was consumed domestically and 1.680 million metric tons was exported. India ranks 5th in the world in beef production, 7th in domestic consumption and 1st is exporting.


https://www.youtube.com/watch?v=9SK7XgsLsxQ


http://www.business-standard.com/article/pti-stories/muslim-community-in-mathura-hold-anti-cow-slaughter-convention-113061000340_1.html


Nearly 79 lakh cattle slaughtered in Apr 2009-Mar 2012 period

NEW DELHI: The number of cattle slaughtered between April 2009 and March 2012 is estimated at 78.61 lakh, Parliament was informed on Tuesday.

In a written reply to Lok Sabha, minister of state for agriculture Charan Das Mahant said that "the estimated number of cattle slaughtered by States/Union Territories" stood at 24.77 lakh during 2009-10, 23.44 lakh during 2010-11 and 30.4 lakh during 2011-12.

The Minister also informed that there were 1,482 registered slaughter houses across the country at the end of last fiscal.

Maharashtra has 316 registered slaughter houses, followed by Uttar Pradesh at 285 and Andhra Pradesh at 185.

"The data on unauthorised slaughter house for cattle is not available with the department since such information are not collected from States/UTs governments. Registration of slaughterhouses is in the domain of State/UTs governments," Mahant said. 




गाय माता के सभी भक्त जो उन्हें बचाना चाहते है हम से जुड़े !

26 June 2013

अंडे का सच :



http://www.youtube.com/watch?v=261Z8kDhZd4



आजकल मुझे यह देख कर अत्यंत खेद और आश्चर्य होता है की अंडा शाकाहार का पर्याय बन चुका है ,ब्राह्मणों से लेकर जैनियों तक सभी ने खुल्लमखुल्ला अंडा खाना शुरू कर दिया है ...खैर मै ज्यादा भूमिका और प्रकथन में न जाता हुआ सीधे तथ्य पर आ रहा हूँ
मादा स्तनपाईयों (बन्दर बिल्ली गाय मनुष्य) में एक निश्चित समय के बाद अंडोत्सर्जन एक चक्र के रूप में होता है उदारहरणतः मनुष्यों में यह महीने में एक बार,.. चार दिन तक होता है जिसे माहवारी या मासिक धर्म कहते है ..उन दिनों में स्त्रियों को पूजा पाठ चूल्हा रसोईघर आदि से दूर रखा जाता है ..यहाँ तक की स्नान से पहले किसी को छूना भी वर्जित है कई परिवारों में ...शास्त्रों में भी इन नियमों का वर्णन है
इसका वैज्ञानिक विश्लेषण करना चाहूँगा ..मासिक स्राव के दौरान स्त्रियों में मादा हार्मोन (estrogen) की अत्यधिक मात्रा उत्सर्जित होती है और सारे शारीर से यह निकलता रहता है ..
इसकी पुष्टि के लिए एक छोटा सा प्रयोग करिये ..एक गमले में फूल या कोई भी पौधा है तो उस पर रजस्वला स्त्री से दो चार दिन तक पानी से सिंचाई कराइये ..वह पौधा सूख जाएगा ,
अब आते है मुर्गी के अण्डे की ओर
१) पक्षियों (मुर्गियों) में भी अंडोत्सर्जन एक चक्र के रूप में होता है अंतर केवल इतना है की वह तरल रूप में ना हो कर ठोस (अण्डे) के रूप में बाहर आता है ,
२) सीधे तौर पर कहा जाए तो अंडा मुर्गी की माहवारी या मासिक धर्म है और मादा हार्मोन (estrogen) से भरपूर है और बहुत ही हानिकारक है
३) ज्यादा पैसे कमाने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर आजकल मुर्गियों को भारत में निषेधित ड्रग ओक्सिटोसिन(oxytocin) का इंजेक्शन लगाया जाता है जिससे के मुर्गियाँ लगातार अनिषेचित (unfertilized)  अण्डे देती है
४) इन भ्रूणों (अन्डो) को खाने से पुरुषों में (estrogen) हार्मोन के बढ़ने के कारण कई रोग उत्पन्न हो रहे है जैसे के वीर्य में शुक्राणुओ की कमी (oligozoospermia, azoospermia) , नपुंसकता और स्तनों का उगना (gynacomastia), हार्मोन असंतुलन के कारण डिप्रेशन आदि ...
वहीँ स्त्रियों में अनियमित मासिक, बन्ध्यत्व , (PCO poly cystic oveary) गर्भाशय कैंसर आदि रोग हो रहे है
५) अन्डो में पोषक पदार्थो के लाभ से ज्यादा इन रोगों से हांनी का पलड़ा ही भारी है .
६) अन्डो के अंदर का पीला भाग लगभग ७० % कोलेस्ट्रोल है जो की ह्रदय रोग (heart attack) का मुख्य कारण है
7) पक्षियों की माहवारी (अन्डो) को खाना धर्म और शास्त्रों के विरुद्ध , अप्राकृतिक , और अपवित्र और चंडाल कर्म है

इसकी जगह पर आप दूध पीजिए जो के पोषक , पवित्र और शास्त्र सम्मत भी है

17 June 2013

WTO: देश को लूटने का षड़यंत्र...



ये है कहानी भारत को कैसे गुलाम बनाया जा रहा है ..... इससे निकलना ही एक मात्र रास्ता है बचने का ....

जरूर देखें और फेलायें : 

http://www.youtube.com/watch?v=94uhgFs5cOc



1 Jan 2005 से WTO  देश में लागू  हुआ
15 Dec. 1994 में हस्ताक्षर किये.... इस बीच सब पार्टियों ने शाशन किया... वे भी जिन्होंने आन्दोलन किया इसके खिलाफ.......

यह ऐसा समझोता जिसमे देश के कृषि, उद्योग, व्यापार, शिक्षा, बैंकिंग, बौधिक सम्पदा, बीमा और  चिकित्सा जैसे सवेदनशील शेत्रो पर असर परेगा और पर  रहा हे.. बल्कि  देश की संप्रुभता ही WTO की गिरवी हो रही है,, चर्च की ही नहीं.....


इसे या तो पूरी तरह से स्वीकार या फिर छोर सकते हे...... (ऐसा नहीं की कुछ बिंदु हम मान ले और कुछ नहीं...)


1 और 2 baar discussion सदस्य देशो के बीच मीटिंग हर साल, 126 से ज्यादा सदस्य...

 28 subujects है, जो अपने आप में अग्रीमेंट हे..

इतिहास:


1930 -- में मंदी आई... उसे दूर करने के लिए World War II (1939-1945) हुआ,  West countries की मान्यता हे की ज्यादा मंदी हुयी तो युद्ध करो... हथियार बढ़ेंगे... पैसा आएगा... क्यों? क्योकि उनका (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, गेरमन्य) मुख्य business हथियार बनाना है और इससे 10 तरह के और उद्योग जुड़े हे...         


1945 UNO बना की अब युद्ध न हो.. लेकिन 325 युद्ध हुए.....

अर्थव्यस्था सुधारने के लिए World बैंक, IMF बने.... पर असल में यह सब दुसरे देशो को गुलाम बनाने के ही नए हथियार थे...

दुसरे विश्व युद्ध में यूरोपीय देश की तबाही ज्यादा हुई, इसलिए वर्ल्ड बैंक ने कम इंटेरेस्ट पे इनको लोन दिया.... अमेरिका को कम नुक्सान हुआ और उसने ब्रिटेन के उपनिवेशवाद को  ख़तम करके... अपने नए तरह के नए तरीके ढूदे ..... जैसे कानून से, कंपनियों को बढ़ावा दे के.. वर्ल्ड बैंक, और इम्फ बना के.... WTO, ETC.

1948 -- विश्व के व्यपार को व्यस्थित और सरल बनाने के उद्देस्य से General Agreement on Trade & Tariff (GATT)(तटकर एव व्यापर पर सामान्य समझोता) बनाया. 30 Oct. 1947 में हस्ताक्षर  किये... Jan. 1948 में लागू ..                  मुख्य  उदेसय:    टैक्स, कस्टम, आयात करो को सुलझाना..          

  
1948-1986 तक व्यापार अच्छा चला...
चीन ने इसे 53 सालो तक इससे स्वीकार नहीं किया...
 
1980 के आस-पास फिर मंदी हुयी यूरोपे और अमेरिका में.. कई कोम्पनीया  बंद हो गयी........ बेरोज़गारी बढ़ गयी.......

फिर युद्ध हुआ:  इरान-इराक  जो की 8 साल तक चला...

फिर खाड़ी युद्ध हुआ:  अफगानिस्तान ...    तो यूरोपे में हर 30-40 साल में मंदी आती हे.. अब उनको स्थायी इलाज़ चाहिए.....
इसलिए उन्होंने इसका आधार बनाया GATT को....
  
IInd Phase:


1986 उरुग्वे की मीटिंग में GATT के शेत्र को बाधा दिया गया... इसमें 28 विषय और जोड़ दिए गए.....
Till 1986  तक किसी भी देश के आंतरिक सम्प्रोभाता से जुड़े मामले GATT में नहीं थे....   लेकिन 1986 में ये दाल दिए गए... जो की किसी भी देश के लिए खतरनाक हे..

Team Head:  Arthor Dunkel (अमेरिका का था)

1986-1991 -- अमेरिका और यूरोपे के सदस्यों ने यह बिल ड्राफ्ट किया.... और 1991 में विचार के लिए टेबल में रख दिया...    

अफ्रीका, एशियन, लातिन अमेरिकेन -- भारत, ब्राज़ील, मिश्रा, Nigeria, ने इसका खुल के विरोध किया...  क्योकि इसमें ज्यादातर शर्ते अमेरिका और यूरोपे के फायदे के लिए ही थी ...


भारत ने कुछ शर्ते जो गरीब देशो के हित में थी उनको रखने की कोशिश करी पर नाकाम रहे.... इसलिए भारत ने कहा की यह भारतीय हितो में नहीं हे... और इसमें हस्ताक्षर करने से मन कर दिया.....उस समय पुरे देश में इसका विरोश हो रहा था....


परन्तु.......     15 Dec. 1994  को भारत की सरकार ने देश के साथ दोखा करके.. व् देश को अँधेरे में रख के इसमें हस्ताक्षर कर दिए.....   


1991-1994 --- चर्चा के समय वर्ष मतलब 4 साल में संसद में सिर्फ 11 घंटे चर्चा हुयी.....  मतलब इतने बड़े, इतने महतवपूर्ण विषय पे जिसमे की देश की संप्रुभता का सवाल था... जिसमे हमारे किसानो का रोज़ी-रोटी, व्यापारिया का जीवन... सब कुछ.. दाव पे लगा था... उसमे सिर्फ इतने घंटे ही बहस....

थोरा सा बहस बंगाल और पूजब में हुयी.... और थोरा सा अखबारों के माध्यम  से.....

इसके मुख्या तीन शेत्र हे....


I. कृषि:

हर देश अपने-अपने किसानो को और कृषि उत्पादन में तरह-तरह से मदद करती हे.... जैसे:
 न्यूनतम समर्थन मूल्य देना..
रासायनिक खाद/कित्नाशाको को सस्ते दरो पर देना..
कम ब्याज पर लोन देना..
किसी मुसीबत के समय लोन माफ़ करना ..या ब्याज का माफ़ करना...
कम कीमत पे बिजली देना....
विदेशो से उत्पादों पे मात्रात्मक प्रतिबन्ध लगाना ताकि हमारे गृह उद्योग, कृषि को नुक्सान न हो.....

WTO में कृषि में मुख्या रूप से 3 शेत्र हे: 

1. Subsidy                                    2. Market Access             
3. उत्पादों को विदेशो में निर्यात की सहयता (विदेशी सामानों को हमारे यहाँ लाने में sahayata)

According Article 3 : ==>  Domestic Support (घरेलु सहायता) i.e.. Subsidy को लगातार कम करना होगा....

        और हमारी सर्कार ने हस्ताकाक्षर करने से लागो करने तक (1994-2005) 24% सुब्सिद्य कम कर दी थी...    और आने वाले प्रत्येक वर्ष में यह कटोती होते-होते 5% तक रह जायेगी.....
         ==> मतलब भारत की सरकार सिर्फ 5% से ज्यादा subsidy नहीं दे सकती ....  यह अलग-अलग या कुल भी हो सकती हे...

Subsidy:      Direct       Indirect         

   
Direct:  किसान कृषि उत्पादों को बाज़ार में बेचता हे... सर्कार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाता हे... भारत में यह अंतर-रास्ट्रीय   बाज़ार के खुले मूल्य से अक्सर अधिक होता हे.....
उदहारण:       2005 में कपास का मूल्य         1500 - 1700 rs. per quintal   ---   अंतर-रास्ट्रीय बाज़ार में... (विदेश में..)   
                                                            2000 - 2500 rs. per quintal   ---   रास्ट्रीय बाज़ार में.. (हमारे देश में...)    

तो direct subsidy का मतलब अंतर-रास्ट्रीय   खुले बाज़ार से अधिक मूल्य पर किसानो की फसल खरीदना हे....


Indirect Subsidy:


1.   Urea, DAP, Phosphate किसानो को कम मूल्य पर मिलता हे....  
उदहारण:           100 kg. cost ==>  980 rs.    
                        किसान को कीमत   560 rs.          इसलिए   indirect subsidy  हुयी....   =    420 rs.

2.  कम कीमत पर बीजली, पानी देना.....   

उदहारण:   औधोगिक बीजली  का रेट:   5-6 rs. प्रति यूनिट  हे....      पर किसानो को दी जाती हे...     2-3 rs प्रति यूनिट......

Market Access:
Article 4
भारत  के   बाजारों   को  खोलना  होगा  विदेशी   उत्पादों  के  लिए …   कोई  प्रतिबन्ध  नहीं ….
अभी  मात्रात्मक  प्रतिबन्ध और  आयात  कर  लगाये  जाते  है  ताकि  हमारा बाज़ार  विदेशी  सामानों  से  पट  न  जाए ….
Article 5.4 
ज्यादा  आयात  कर  नहीं  लगा  सकते ……. WTO लागो  होने  तक  (1994-2005)   आयात  कर  में  35% से  70% तक  कमी  कर  दी  थे … सरकार  ने …..   तो  यह  सरकार  तो   हमारे  लिए  काम  ही  नहीं  कर  रही …
Article 7 & 9:
कृषि  उत्पादों  पर  निर्यात  सुब्सिद्य  में  कटोती  व्  अन्य  व्यपार  विरोधी  subsidy में  भी  कटोती  करनी  होगी …
इससे  हमारा  निर्यात  कम  होगा … हमारे  सामान  कम  बिकेंगे … व्  मेहेंगे   बिकेंगे …. जबकि  विदेशी  सामान  सस्ते  मिलेंगे …. तो  हमारे  गृह  व्यापारियों , गृह  उद्योगों  को   मारने  का  षड़यंत्र  हे  ये  WTO….

चाय , कोफ्फी , कपास , सब्जिया , फल , चावल , गेहू , घी , मेवा ,  आद्दी  आदि  में  व्यापार  घटा  ज्यादा  होगा …   उसको  पूरा  करने  के  लिए  हमारा  देश  और  अधिक  क़र्ज़  लेगा … ज्यादा  टैक्स  जनता  पर  लगाये  जायेंगे ….  जिससे  महंगाई  और  अधिक  बढ़ेगी ….  पैसे  के  कीमत  और  अधिक  गिरेगी ….

निर्यात  फिर  घटेगा … फिर  हम  क़र्ज़  लेंगे …फिर कोम्पनीया बुलाई जायेंगी... उनको खुली छुट मिलेगी... तो  इस  चक्र  में  हम  फसते  गए … गोल -गोल  घूमते  गए ….


II. बौधिक सम्पति अधिकार  समझोता : TRIPS (Trade Related Intellectual Property Rights)


पहले सिर्फ प्रक्रिया पर ही अधिकार लिया जाता था......

और अब WTO के हिसाब से प्रक्रिया और उत्पाद दोनों के लिए PATENT लेना होगा....

अभी तक कृषि और खाद सुरक्षा, जरूरी दवाओ में Patent नहीं दिया जाता था..... पर अब देना होगा....


पटेंट लेने वाली कंपनी ही उन बीजों का उत्पादन, वितरण कर सकता हे....


1970 के हमारे पुराने पटेंट कानून को बदला गया सिर्फ WTO के हिसाब से....

यह पटेंट 20 साल के लिए दिए जायेंगे.... कंपनी मनमाने ढंग से बाज़ार पे अतिक्रमण करेगी... और फिर थोरा सा फ़ॉर्मूला बदल के फिर अगले 20 सालो का पटेंट ले लेगी....

भारत में   32 crore acre   में खेती की जाती हे....    22 क्रोर टन अनाज का उत्पादन होता हे.... हजारो लाखो टन बीज की जरूरत होती हे..... तो अगर किसी कंपनी ने किसी ख़ास बीज का पटेंट करा लिया तो दूसरी कोई कंपनी उसे बना नहीं सकती बेच नहीं सकती... किसान उसे बना नहीं सकते.... उन्हें सिर्फ उसी कंपनी से ही खरीदना होगा....


हमारे यहाँ गाय का दूध, जमीन ही सम्पति हे....    जानकारी, ज्ञान को दो या दो से अधिक लोग उपयोग कर सकते हे...... हमारे यहाँ बोला जाता हे... की ज्ञान बाटने से ही बढ़ता हे.....ज्ञान को लोगो के साथ नहीं जोड़ा गया.....  कभी लाभ के लिए नहीं माना गया....  पर इन विदेशियों ने इसपर भी अधिकार ज़माना शुरू कर दिया.... हमारे नीम, हल्दी चन्दन और कई चीजों का पटेंट कर लिया हे....



III.   सेवा शेत्र:  


बैंक, बीमा, परिवहन, दूरसंचार, मीडिया,  ADD,  स्वस्थ्य, शिक्षा.....इसमें शामिल किया गया.....
Article 2 :  सरकारी और सैनिक को छोर के सभी शेत्रो को विदेशो के लिए खोलना होगा.....
Switzerland का 90%   income इसी शेत्र से आता हे.....
  जेर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड, america  का  2/3 से ज्यादा रोजगार इसी शेत्र में हे....

कृषि, उद्योग और सेवा शेत्र       अगर इन तीनो पे कब्ज़ा कर लिया तो किसी भी देश का कोई भी दूसरा शेत्र आसानी से नियन्त्र में आ जायेंगे........


WTO  के समझोते के रास्ट्रीय अर्थव्यस्थाओ और प्रथिक्मिताओ का कोई महत्व नही रह जाता...

क्योकि Article 16 para 4:  सदस्य देशो को समझोते के अनुरूप अपने नियम कानून बदलने होंगे...
हमारी संप्रभु संसद की क्या हैसियत रहेगी... सिर्फ  clerk की ही रहेगी....

राज्यों के शेत्र:  :::==>         कृषि,    कृषि    पर subsidy ,      गरीबो को सस्ता अनाज,  सेवा शेत्र,    शिक्षा,  सफाई   और  उद्योग.

सविंधान का मूल सिधांत  हे.....:   बिना राज्यों की सहमति  के उनके  अधिकारों में कोई कटोती नहीं की जा सकती.... इसके लिए सविंधान में राज्य सूचि दे राखी हे..
सविंधान के  Article 249 :   राज्यों से 2/3 बहुमत से पास करा के ही कोई केंद्र राज्यों के लिए कानून बना सकता हे....
Article 252   :
राज्यों की permission ले  के ही उनके लिए कानून बना सकते हे.... 

पर केंद्र ने बिना पूछे इसमें हस्ताक्षर किये.......   आखिर यह किसके कहने पे किया.... किसके लिए किया.... इसके फेलाने की बहुत जरूरत हे......



विकसित देशो के 10 बांको के पास दुनिया की  2/3  पूजी हे.....

जापान के 3 बेंको के पास भारत के GDP से 3 गुना ज्यादा पूजी हे....

 
 1980 में अमेरिका pressure फॉर Liberalisation शुरू हुआ.... अफ्रीकी देशो में विदेशी सामान भर गए,,  निगेरिया, सोमालिया, इथोपिया....आदि देशो में उनका सामान बिकना बंद हो गया.... उसके बाद बहार का सामान महंगा हो गया... फिर वह भुकमरी की समस्या विकराल रूप में पैदा हुई...
 बीच में  1983 में Nigeria ने अमेरिका गेहू पर प्रतिबन्ध लगा दिया... Nigeria के किसानो के कसाबा, ज्वर, बाजरा का उत्पादन बढाया.... तो अमेरिकी कंपनी Kargil ने Nigeria govt. पे pressure बढाया.....nigeria  का कपड़ा अमेरिका में बंद करके.....  तो उसके बाद Nigeria ने फिर अपने बाज़ार अमेरिकी कोम्पनीयू के लिए खोल दिए....   

1950 में Liberalisation शुरू हुआ अमेरिका में.....

1950-1960 तक अमेरिका में   30% तक छोटे छोटे किसान समाप्त हो गए...
1960-1970   तक 26% और कम हुए....
1970-1995   तक 10% हे रह गए...
2005   me     3%-4%   ही रह गए...      
बड़ी बड़ी जजीने किसी एक बड़े आदमी या फिर कम्पनीयों के पास चली गयी....

मतलब   50 - 55  सालो   में   96%  किसान   समाप्त   हो   गए.....
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GATT से पहले भारत में बीजों का उत्पादन पब्लिक सेक्टर की कम्पनीय हे करती थी..  या फिर छोटे छोटे हिस्सों में कुछ कम्पनीय बनती थी... और यह दूसरी कम्पनीय द्वारा बनाई हुई बीजों का उत्पादन करने के लिए भी आज़ाद थी.... किसान भी खुद बना सकते थे... और बेच सकते थे..... परुन्तु....GATT से यह सब बंद हो गया.....

उदहारण:   चावल के फसल में  अगर  'blast '  नामक रोग हो गया... और किसी कंपनी ने ऐसा बीज बनाया जो 'ब्लास्ट'   रोग से free हो तो कोई दूसरी कोम्पन्यी या संगठन यह बीज नहीं बना सकती या बेच सकती...... इस प्रकार यह उस कंपनी की एकाधिकार हो गया....

तो यह समझोता पूर्ण रूप से देश को गुलाम बनाने.. व् विदेशी कोम्पनीएयो के हाथो में बेचने... व् हमारे गृह उद्योगों को ख़तम करने के लिए ही हे..... चाहे कोई भी सरकार आये... इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. ..हम युही धीरे धीरे गुलामी की और ही बढ़ रहे हे......   यह सिलसिला तब जारी रहेगा जब तक हम इस WTO से बहार नहीं आएगा....  












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10 June 2013

मधुमेह (डायबिटीज) का इलाज़




आजकल मधुमेह की बीमारी आम बीमारी है। डाईबेटिस भारत मे 5 करोड़ 70 लाख लोगोंकों है और 3 करोड़ लोगों को हो जाएगी अगले कुछ सालों मे सरकार ये कह रही है | हर दो मिनट मे एक मौत हो रही है डाईबेटिस से और Complications तो बहुत हो रहे है... किसी की किडनी ख़राब हो रही है, किसीका लीवर ख़राब हो रहा है किसीको ब्रेन हेमारेज हो रहा है, किसीको पैरालाईसीस हो रहा है, किसीको ब्रेन स्ट्रोक आ रहा है, किसीको कार्डियक अरेस्ट हो रहा है, किसी को हार्ट अटैक आ रहा है Complications बहुत है खतरनाक है |

जब किसी व्यक्ति को मधुमेह की बीमारी होती है। इसका मतलब है वह व्यक्ति दिन भर में जितनी भी मीठी चीजें खाता है (चीनी, मिठाई, शक्कर, गुड़ आदि) वह ठीक प्रकार से नहीं पचती अर्थात उस व्यक्ति का अग्नाशय उचित मात्रा में उन चीजों से इन्सुलिन नहीं बना पाता इसलिये वह चीनी तत्व मूत्र के साथ सीधा निकलता है। इसे पेशाब में शुगर आना भी कहते हैं। जिन लोगों को अधिक चिंता, मोह, लालच, तनाव रहते हैं, उन लोगों को मधुमेह की बीमारी अधिक होती है। मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है। लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सुखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है। अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रेागी का वजन कम होता जाता है। शरीर में कहीं भी जख्म/घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।

तो ऐसी स्थिति मे हम क्या करें ? राजीव भाई की एक छोटी सी सलाह है के आप इन्सुलिन पर जादा निर्भर न करे क्योंकि यह इन्सुलिन डाईबेटिस से भी जादा खतरनाक है, साइड इफेक्ट्स बहुत है |

इस बीमारी के घरेलू उपचार निम्न लिखित हैं।
आयुर्वेद की एक दावा है जो आप घर मे भी बना सकते है -
1. 100 ग्राम मेथी का दाना
2. 100 ग्राम तेजपत्ता
3. 150 ग्राम जामुन की बीज
4. 250 ग्राम बेल के पत्ते
इन सबको धुप मे सुखाके पत्थर मे पिस कर पाउडर बना कर आपस मे मिला ले, यही औषधि है |

औषधि लेने की पद्धति : सुबह नास्ता करने से एक घंटे पहले एक चम्मच गरम पानी के साथ लेले फिर शाम को खाना खाने से एक घंटे पहले लेले | तो सुबह शाम एक एक चम्मच पाउडर खाना खाने से पहले गरम पानी के साथ आपको लेना है | देड दो महीने अगर आप ये दावा ले लिया और साथ मे प्राणायाम कर लिया तो आपकी डाईबेटिस बिलकुल ठीक हो जाएगी |

ये औषधि बनाने मे 20 से 25 रूपया खर्च आएगा और ये औषधि तिन महिना तक चलेगी और उतने दिनों मे आपकी सुगर ठीक हो जाएगी |
सावधानी :

1. सुगर के रोगी ऐसी चीजे जादा खाए जिसमे फाइबर हो रेशे जादा हो, High Fiber Low Fat Diet घी तेल वाली डायेट कम हो और फाइबर वाली जादा हो रेशेदार चीजे जादा खाए| सब्जिया मे बहुत रेशे है वो खाए, डाल जो छिलके वाली हो वो खाए, मोटा अनाज जादा खाए, फल ऐसी खाए जिनमे रेशा बहुत है |

2. चीनी कभी ना खाए, डाईबेटिस की बीमारी को ठीक होने मे चीनी सबसे बड़ी रुकावट है | लेकिन आप गुड़ खा सकते है |

3. दूध और दूध से बनी कोई भी चीज नही खाना |

4. प्रेशर कुकर और अलुमिनम के बर्तन मे खाना न बनाए |

5. रात का खाना सूर्यास्त के पूर्व करना होगा |

जो डाईबेटिस आनुवंशिक होतें है वो कभी पूरी ठीक नही होता सिर्फ कण्ट्रोल होता है उनको ये दावा पूरी जिन्दगी खानी पड़ेगी पर जिनको आनुवंशिक नही है उनका पूरा ठीक होता है |

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें:
http://www.youtube.com/watch?v=oiRf-LLSq0U

04 June 2013

डेरी किसान व् दुग्ध उद्योग खतरे में ...


हमारे बड़े भाई स्वरुप / हमारे गुरु देवेन्द्र शर्मा के ब्लॉग से हिंदी में रूपांतरित किया हुआ:




जरूर देखें और फेलायें : 

https://www.youtube.com/watch?v=JqD7oapb8ns&list=UUDzt-L-blq4TYjMPpIlJSew&index=29


भारत में दुग्ध उत्पादक बड़ी मुसीबत में है। बढ़ी हुयी लागत और कम होती कीमतों ने उन्हें पीछे धकेल दिया है .. परन्तु ग्राहक के मूल्य यथास्थित हैं, जो कम होने के कोई भी निर्देश नहीं दे रहे ।

जब एनसीपी  नेता प्रफुल पटेल ने एफ डी आई इन रिटेल की बहस के दौरान बोला की कैसे बारामती, महारास्त्र, में कृषि मंत्री शरद पवार ने भरोसा दिया की दुग्ध उत्पादकों को कम से कम Rs 20 लीटर का मूल्य मिलेगा, तो मुझे हंसी आयी । यह कोई उचित मूल्य नहीं है , बल्कि किसानों को दुःख देने वाला ही है। सभी कॉर्पोरेट और प्राइवेट प्लांट्स इसके आस पास ही मुल्य दे रहे हैं ।  

दूध के तैयार बड़े भंडार, लेकिन कमजोर निर्यात मांग, के कारण  दुग्ध उद्योग अपने नुक्सान कम करने की कोशिश कर रहा  है । इसलिए वह अपने नुक्सान को मूलतः सुरुवाती किसानों पर ढोने की कोशिश कर रहा है । और इस तरह की स्थिति भारत के लिए कोई अच्छी नहीं है । इसलिए यह जान्ने की कोशिश करें की कैसे अंतररास्ट्रीय समुदाय ने कदम उठाये ...

2009,  कैलिफ़ोर्निया में 1,800  में से लगभग 20 प्रतिशत दुग्ध फर्म्स, चारे व् यातायात की बढ़ी हुयी कीमत की वजह से बंद हो गयी । इसी तरह 2009 में जब अन्त्रास्त्रीय बाजार में दूध की कीमत गिरी, यूरोपियन समूह ने WTO की शर्ते खारिज करते हुए  से दूध में सब्सिडी शुरू करी  । इसमें 3600 करोड़ की सब्सिडी शामिल थी ताकि दूधिये अपने नुक्सान की भरपाई कर सके ।

अमेरिका और यूरोपियन समूह हमेश अपने डायरी किसानों को बचने की कोशिश ही की है । मुझे ये बात समझ में नहीं आती की क्यों हमारे यहाँ गृह दूधियों को बर्बाद होने दिया जा रहा है जबकि कीमत गिरने में उनका कोई  नहीं । जब प्राइवेट और सहकारिता उद्योग ने दूध की कीमत को
Rs 20.50 तक गिर दिया , तो फिर जानवरों को पलना खर्चीला ही होगा । पंजाब गुजरात महारास्त्र, और राजस्थान में बहुत ही किसानों ने दूध उत्पादन छोर दिया ।

अब देखते है कैसे यूरोप कैसे सामना किया इस मुश्किल से । यूरोपियन समूह में करीब 10 लाख डेरी किसान हैं । पूरा मिला के ये भारत या अमेरिका से ज्यादा दूध उत्पादन करते हैं । WTO के हिसाब से , एरोपेअन समूह ने अपनी डेरी सब्सिडी को ख़तम करना होगा ।  परन्तु कौन परवाह करता है जब ये घरेलु मामला बन जाता है । यूरोपियन समूह ने दुबारा सब्सिडी देना सुरु किया ताकि उनके दूध उत्पादन को सहारा मिल सके और साथ ही एक्सपोर्ट को भी । यह करने से यूरोपियन समूह पुरे विश्व  बाजार के लगभग 32 प्रतिशत मात्रा पर कब्ज़ा कर सका  ।

डेरी फार्मर ऑफ़ कनाडा (DFA ), के अनुसार EU के डेरी किसान लगभग Rs 3.96 करोड़ सब्सिडी प्राप्त होता है ।

इस तरह की भारी सब्सिडी वहां के किसानों को बाजार के उतार चढाव से बचाती है, और साथ ही उन्हें सब्सीडाइजड दूध को विकाशशील देशो में डंप करवाती है ।

एक्सपोर्ट बाजार को देखते हुए, EU ने EU-
India Free Trade Agreement (FTA) में मांग की है दूध पे टैक्स 90 प्रतिशत तक घतियी जाए ।  EU भारत को एक दूध व् दूध के प्रोडक्ट के बड़े बाजार के रूप में देखता है और चाहता है की भारत अपने घरेलु दरवाजे यूरोपियन समूह के लिए  खोले ।

कम होते फार्म्स 


अमेरिका में
1992 से डेरी फार्म्स लगभग 61 प्रतिशत  कम हो गए । और अब सिर्फ 51,480  ही डेरी फार्म्स बचे है । ये फर्म्स Rs 27,500 करोड़ रुपये प्राप्त कर चुके है 2009 से, मतलब उनके दूध की कीमत का तीसरा हिस्सा सब्सिडीइजेड है । ये सब्सिडी बिभिन्न  रूपों से  आती है: milk income loss contract payment; market loss assistance; milk income loss transitional payment; dairy economic loss assistance programme; milk marketing fees; dairy disaster assistance; and dairy indemnity.

EU अपने डायरी एक्सपोर्ट के लगभग 50 प्रतिशत को सब्सिडी देती है।
सामान्यतः कहा जाता है की अमेरिका और एरोपे के किसान सिर्फ प्राइवेट सप्लाई चैन पर ही निर्भर है .. ऐसा सच नहीं है .. मार्च
2009, के बाद EU ने एक्स्ट्रा (सरप्लस) मक्खन, दूध ख़रीदन सुरु किया। अमेरिका में भी येही किया गया । और इसके अलावा, 2002 से वहाँ दूधियों को  सीधे कैश सब्सिडी देना भी सुरु किया जब भी कीमते गिरी । 

ऐसा नहीं है की राज्य सरकारों के पास पर्याप्त साधन नहीं है .. जैसे पंजाब ने
Rs 1250 करोड़ रुपए का इंटरेस्ट फ्री लोन दिया और जिसमे 15 साल का टैक्स होलिद्य दिया स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल को बठिंडा में रेफिनारी लगाने के लिए । मुझे ये समझ में नहीं आता की सर्कार छोटे किसानो  को क्यों नहीं बचाना चाहती जो की डूब रहे हैं ।


इसलिए सरकार को चाहिए की  वे सहकारिता को सुस्बिद्य दे और जिससे मुल्य 25 rs तक कम से कम हो . दूसरा बैंक का इंटरेस्ट भी कम करना चाहिए जो की अभी
12.5 से 7 तक होना चाहिए ।

सर्कार को चाहिए की दुग्ध उत्पादकों को बचाए 
इससे पहले की वे इसको छोड़े जिससे भारत गहरी कमी में पड  जाएर और भारत को इसका बड़ा आयातक होना पड़ जाए |


सूत्र :
Milk crisis loomingDeccan Herald, Jan 5, 2013.
http://www.deccanherald.com/content/303002/milk-crisis-looming.html